जब मां ने आरडी बर्मन से कहा- तुम मेरी लाश पर ही आशा से शादी करोगे, ऐसे हुई थी दोनों की शादी!

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60 के दशक से लेकर 80 के दशक तक सुपरहिट गाने देने वाले संगीतकार और गायक राहुल देव बर्मन यानी आरडी बर्मन जिनको लोग पंचम दा  के नाम से भी जाना जाता है का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था।उनके म्यूजिक ने लोगों के दिलों पर राज किया और आज की पीढ़ी के जुबां पर चढ़े हुए हैं। ओ मेरे दिल के चैन से लेकर गुम है किसी के प्यार में तक उन्होंने सदाबहार म्यूजिक दिए। उनकी और आशा भोसले की प्रेम कहानी भी काफी म्यूजिकल रही है। पंचम के पुण्यतिथि पर जानिए उनकी लव स्टोरी…

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आरडी बर्मन ने 1950 के दशक में म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा। सचिन देव बर्मन के बेटा होने की वजह से उनसे कई उम्मीदें थी, वह उन सभी उम्मीदों पर खरे भी उतरें और अपना अलग मुकाम स्थापित किया। वह जब बच्चे थे तो पांच अलग-अलग आवाज में रोते थे, इसलिए उनका पंचम पड़ा। उन्होंने उस्ताद अली अकबर खान और आशिष खान से संगीत सीखा। इसके बाद उन्होंने ऐसा म्यूजिक कंपोज किए, जिसे पहले किसी ने भी नहीं सुने थे।

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1956 में 23 साल की आशा भोंसले पहली बार आरडी बर्मन से मिलीं। प्लेबैक सिंंगर के रूप में वह तब तक नाम और पहचान दोनों बना चुकी थीं। आरडी मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के टीनएज बेटे थे। दस साल बाद दोनों ने जिस पहली फिल्म में साथ मिलकर काम किया, वो तीसरी मंजिल थी। इसी के साथ उस क्रिएटिव और रोमांटिक पार्टनरशिप की शुरुआत हुई जिसने हिन्दी फिल्म के म्युजिक में बहुत कुछ बदल दिया।आरडी ने अपनी संगीत में नए एलीमेंट्स डाले।जबकि आशा की आवाज एक अलग नशा था।

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तब तक पंचम दा और आशा भोसले दोनों की ही पहली शादी टूट चुकी थी। पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से अलग हो गए थे। वो रीता पटेल से इतना परेशान हो चुके थे कि घर छोड़कर होटल में रहने चले गए थे। वहीं आशा भोसले अपने पति गणपतराव भोंसले से बिल्कुल खुश नहीं थीं। एक दिन ऐसा आया जब दो बेटों और एक बेटी के साथ गर्भवती आशा ने अपनी बहन के घर की ओर रुख किया। उनका तीसरा बेटा इसी के बाद हुआ।

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इसी बीच आशा भोसले लगातार पंचम के लिए गाने गा रही थीं। दोनों के गाने सुनकर ऐसा लगता था कि पंचम का संगीत और आशा की सुरीली आवाज एक दूसरे के लिए ही बने हैं। कई सालों तक बगैर शब्दों के ही उनके एहसास संगीत की तरह रोमांस बनकर बहते रहे। संगीत उन्हें करीब ला रहा था। इस दौर में दोनों ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए।

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दोनों की शादी का रास्ता इतना भी आसान नहीं था। आशा की उम्र पंचम से ज्यादा थी जिस वजह से उनकी मां इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं। जब पंचम ने अपनी मां से शादी की अनुमति मांगी तो उन्होंने गुस्से में कांपती हुई आवाज में कहा- ‘जब तक मैं जिंदा हूं ये शादी नहीं हो सकती, तुम चाहो तो मेरी लाश पर से ही आशा भोसले को इस घर में ला सकते हो।’

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आज्ञाकारी पंचम ने मां से उस वक्त कुछ नहीं कहा और चुपचाप वहां से चले गए। फिर उन्हें शादी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा हालांकि शादी तो उन्होंने मां के जीते जी ही की लेकिन मां की ऐसी हालत हो चुकी थी कि उन्होंने किसी को पहचानना बंद कर दिया था।  पंचम और आशा की ये म्यूजिकल लव स्टोरी का सफर ज्यादा दिन तक नहीं चल सका और शादी के 14 साल बाद ही पंचम दा, आशा भोंसले को अकेले छोड़कर 54 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए।