हैदराबाद यूनिवर्सिटी की डॉ. सीमा मिश्रा ने बनाया वायरस से लड़ने वाला टीका!

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दोस्तों पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का लगातार कहर बढ़ता जा रहा है। इस वायरस की वजह से कई देश आज पूरी तरह लॉक डाउन हो चुके है, हमारे देश में भी 21 दिनों का लॉक डाउन किया गया है। हमारे देश में अब तक 1000  ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके है, और 25 से ज्यादा लोग अपनी जान गया चुके है वही पूरी दुनिया में 7 लाख से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके है और और 30 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गवा चुके है, चीन के वुहान शहर से फैला यह वायरस तकरीबन सभी देशों को अपनी चपेट में ले चुका है।इस वायरस को लेकर लगातार हर देशमें रिसर्च जारी है और इस वायरस के वैक्सीन को बनाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच खबर आ रही है की हमारे देश में यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद में एक टीका तैयार किया है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के जैव रसायन विभाग की एक संकाय सदस्य ने कोरोना वायरस को लिए एक टीका तैयार किया है। इस टीके को टी सेल एपिटोप्स कहा जाता है जो नोवल कोरोना वायरस के सभी ‘संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों के परीक्षण के लिए बनाया है।’ एक विज्ञप्ति में बताया गया है, ‘हैदराबाद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज की संकाय सदस्य डॉक्टर सीमा मिश्रा ने परीक्षण के लिए सेल एपिटोप्स नामक संभावित टीके उम्मीदवारों को डिजाइन किया है जो नोवल कोरोना वायरस (2019-nCoV) के सभी संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों के खिलाफ बनाया है। ये टीका छोटे कोरोना वायरल पेप्टाइड्स हैं, जो अणुओं की कोशिकाओं के जरिये उपयोग किया जाता है। इससे इन वायरल पेप्टाइड्स को नुकसान पहुंचाने वाली कोशिकाओं को खत्म करने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता तैयार की जा सके। कम्प्यूटेशनल सॉफ्टवेयर के साथ शक्तिशाली इम्यूनोइंफोर्मेटिक्स का प्रयोग करते हुए, डॉक्टर सीमा मिश्रा ने इन संभावित एपिटोप्स को ऐसे डिजाइन किया है कि पूरी आबादी को इसका टीका लगाया जा सकता है।

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विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, ‘आमतौर पर किसी टीके की खोज में 15 साल लगते हैं, लेकिन शक्तिशाली कम्प्यूटेशनल टूल ने लगभग 10 दिनों में इस वैक्सीन को बनाने में मदद की। वायरस को रोकने के लिए मानव कोशिकाओं द्वारा कितना प्रभाव इस्तेमाल किया जाएगा, इसके आधार पर संभावित टीकों की एक रैंक सूची तैयार की गई है। मानव प्रोटीन पूल में मौजूद किसी भी मैच के साथ इस कोरोनवायरल एपिटोप्स मानव कोशिकाओं पर कोई विपरित असर नहीं डालते हैं इसलिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया वायरल प्रोटीन के खिलाफ होगी न की मानव प्रोटीन के। हालांकि इन परिणामों को निर्णायक रूप प्रदान करने के लिए प्रयोगात्मक रूप से जांच की जानी है। इन परिणामों को तत्काल प्रयोगात्मक कसौटी पर परखने के लिए चेमआरजीव (ChemRxiv) प्रीप्रिंट प्लेटफॉर्म का उपयोग करके वैज्ञानिक समुदाय में प्रसारित किया गया है। एनकोव (nCov) टीका डिजाइन पर ये भारत का पहला ऐसा अध्ययन है जो वायरस द्वारा बनाने ववाले संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक प्रोटीनों में पूरे कोरोनवायरल प्रोटिओम की खोज करता है।’