इन दो अधूरी इच्छाओ के साथ ऋषि कपूर ने छोड़ दी ये दुनिया, बेटे रणबीर की शादी भी है इसमें शामिल!

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दोस्तों बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन मुंबई के अस्पताल में 30 अप्रैल को हो गया था।ऋषि कपूर ने अपने 50 साल के फिल्मी करियर में एक से एक शानदार फिल्में कीं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्म फेयर सहित बड़े पुरस्कार तो उन्हें अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही मिल गए थे। लेकिन ऋषि कपूर को एक बात का मलाल हमेशा रहा कि फिल्मों में अपना विशिष्ट योगदान देने के बावजूद उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान नहीं दिया।

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बता दे की अभिनेता ऋषि अपने दिल की कुछ खास बातें सार्वजनिक नहीं करते थे। लेकिन जब इस संबंध में कुछ बरस पहले उनसे बात की तो उनके हृदय की टीस बाहर निकल आई और वह काफी देर तक अपने दिल की बातें करते रहे। असल में एक बार इस बात पर काफी रिसर्च करके यह जानने का प्रयास किया कि ऐसी कौन सी फिल्मी हस्तियां हैं,जिनका फिल्म संसार में योगदान तो बहुत बड़ा है लेकिन सरकार ने उन्हें अभी तक पद्म पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया। ऐसे कई सितारे है जिन्होंने फिल्म क्षेत्र में बरसों के योगदान के बाद भी पद्म सम्मान नहीं मिला।

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हर साल बहुत जूनियर और ऐसे कलाकारों को भी पद्मश्री मिलता आ रहा है जिनमें से कुछ का तो योगदान भी कुछ खास नहीं है। तब मैंने पत्रकारों, लेखकों, और कलाकारों की संस्था ‘आधारशिला’ के अध्यक्ष होने के नाते स्वयं दिसम्बर 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर अपील की थी कि सरकार ऐसे कलाकारों को भी पद्म पुरस्कार दे जिन्हें यह सम्मान बरसों पहले मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। तब ऋषि कपूर ने कहा था- मुझे 42 साल हो गए काम करते हुए। मेरी पहली फिल्म ‘बॉबी’ 1973 में आई थी और अब 2015 चल रहा है। और यदि मेरी चाइल्ड आर्टिस्ट वाली फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ को भी लें तब तो अब 45 साल हो गए।”

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पद्म पुरस्कारों के बारे में उन्होंने कहा था- देखिए सैफ को भी पद्मश्री मिल गया। क्या कह सकते हैं। सरकार को लगा होगा के मेरे से ज्यादा योगदान उनका है। चलिए अब क्या कहें, आप जैसे मित्र और पत्रकार ऐसा सोचते हैं कि हमको यह सम्मान मिलना चाहिए। यह भी बड़ी बात है। असल में सम्मान समय रहते मिल जाए तो अच्छा है।कपूर खानदान में पृथ्वीराज कपूर के साथ राज कपूर को भी दादा साहब फाल्के और शशि कपूर को पद्मभूषण मिल चुका है। इस पर ऋषि कपूर ने कहा था- “सरकार ने कपूर परिवार को सम्मानित किया यह अच्छी बात है और इसके लिए हमारा परिवार सरकार का आभारी है। लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि यदि एक परिवार में और भी अच्छे और बड़े कलाकार हैं तो उन्हें भुला दिया जाए। मुझे पद्मश्री नहीं मिला, लेकिन इससे ज्यादा दुख मुझे इस बात का है कि शम्मी अंकल को तो कुछ भी नहीं मिला। जबकि आप जानते हैं शम्मी अंकल जैसे लाजवाब अभिनेता का फिल्म इंडस्ट्री में कितना बड़ा योगदान है। लेकिन वह बिना कोई ऐसा सम्मान पाए दुनिया से चले गए।”

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ऋषि कपूर पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक बहुत बड़े प्रशंसक के रूप में उभरे थे। किसी भी मसले पर वह तुरंत ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया देते थे। यहाँ तक गत 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान शाम को 5 बजे,मुंबई में अपने घर की बालकनी से, ऋषि कपूर थाली को लगातार ऐसे बजाते रहे, जैसे बरसों पहले फिल्म ‘सरगम’ में उन्होंने ‘ढपली वाले ढपली बजा’ कर लोगों का दिल जीता था। ऋषि कपूर का 2 अप्रैल का अंतिम ट्वीट भी जय हिन्द और तिरंगे के निशान के साथ समाप्त होता है। जिसमें ऋषि ने कोरोना की जंग को मिलकर जीतने के साथ पुलिस, डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ आदि पर पत्थर न फेंकने और उनके साथ मारपीट न करने की अपील भी की थी। लेकिन कोरोना की जंग जीतने से पहले वह अपनी जिंदगी की जंग हार गए।