ऋषि कपूर की अंतिम यात्रा शामिल नहीं हो सके 50 लोग भी, वही राज कपूर के दर्शन को उमड़ा था जन सैलाब!

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दोस्तों बॉलीवुड जगत ने अप्रैल 2020 के अंतिम दो लगातार दिनों में फिल्म जगत ने दो बड़ी शख्‍सियतों को खोया। दोनों की अंतिम यात्रा में महज 40 लोगों को ही शामिल होने की इजाजत थी। जाने माने अभिनेता स्टार ऋषि कपूर की अंतिम यात्रा में 30 लोग भी शामिल नहीं हो पाए। लेकिन महज एक पीढ़ी पहले ऋषि के पिता राज कपूर की अंतिम यात्रा में मुंबई की सड़कें जाम हो गई थीं।ऋषि कपूर की अंतिम यात्रा शामिल नहीं हो सके 50 लोग भी, वही राज कपूर के दर्शन को उमड़ा था जन सैलाब! 7

ऋषि कपूर की अंतिम यात्रा शामिल नहीं हो सके 50 लोग भी, वही राज कपूर के दर्शन को उमड़ा था जन सैलाब! 8

बता दे की सड़क पर हजारों लोग बस पीछे-पीछे चले जा रहा था कि किसी तरह से शोमैन का अंतिम दर्शन करने के लिए लेकिन किस्मत देखिये उनके बेटे और जाने माने अभिनेता ऋषि कपूर को चंद लोग ही विदाई देने पहुंचे थे। राज कपूर के निधन के दौरान आरके स्टूडियो में उनका पार्थ‌िव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तो वही उनके बेटे ऋषि ही वहां खड़े हुए थे।

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चिंटू लगातार एक कपड़े से हवा कर रहे थे। तब करीब पांच तल्ले ऊपर से भी इमारतों में लोग खड़े होकर राज और ऋषि को देख रहे थे।शम्मी, शशि, रणधीर, राजीव पूरा कपूर खानदान और बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे वहां आगे-पीछे मंडराते रहे। जब राज कपूर की चिता को मुखाग्नि दे दी गई तब पूरा कपूर खानदार एक कतार में खड़ा हो गया।  इसके बाद सिने जगत के सभी बड़े नाम एक-एक कर के सभी कपूर खानदान को गले लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। कपूर खानदान के सभी लोग पैर छूकर बड़े लोगों सम्मान करते और हाथ जोड़े खड़े रहते।

बता दे की राज कपूर दादा साहब फाल्के पुरस्कार लेने दिल्ली गए हुए थे। उन्हें अस्थमा की बीमारी थी। इसलिए वो अपने साथ ऑक्सीजन का सिलेंडर रखते थे। लेकिन दादा साहब फाल्के पुरस्कार लेने के लिए वो राष्ट्रपति भवन के अंदर ऑक्सीजन का सिलेंडर नहीं ले जा सके। राष्ट्रपति केआर नारायणन जब शोमैन को लेकर भाषण दे रहे थे तभी शोमैन को दौरा पड़ा। दर्शकों के बीच उनकी तबीयत एकदम से बिगड़ी।राष्ट्रपति ने भाषण बीच में छोड़कर उन्हें दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया। बाद में इलाज के दौरान एम्स में उनका निधन हो गया।