इन फिल्मो के दम पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बॉलीवुड में बनाई अपनी खास जगह, सेक्रेड गेम्स के बाद नहीं दी अब तक कोई हिट फिल्म!

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बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। 46 साल के हो गए हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी। सरफरोश और शूल जैसी फिल्मों में छिटपुट किरदारों के साथ शुरू हुआ नवाज का करियर जितना उनके किरदारों के लिए चर्चा में रहा है,नवाजुद्दीन के निभाए हर किरदार को दर्शकों ने हमेशा सराहा है, लेकिन उनका बॉलीवुड तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने मुंबई में गरीबी के दिन झेले हैं।

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हालत यह थी कि दिन में एक टाइम खाना मिलने के बाद दूसरे टाइम खाना मिलेगा या नहीं इसका कोई ठिकाना नहीं था। लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है लेकिन  नेटफ्लिक्स की सीरीज सेक्रेड गेम्स में अपने करियर का शीर्ष पा चुके नवाज का करियर अब ढलान पकड़ चुका है। उनके नाम का तिलिस्म मोतीचूर चकनाचूर और घूमकेतु जैसी फिल्मों में चूर चूर हो रहा है। उनके लिए समय शायद एक लंबे ब्रेक का और फिर थोड़ा पीछे जाकर लंबी छलांग का है। अब तक जहां नवाजुद्दीन सिद्दीकी पहुंचे हैं, वहां तक भी बिरले ही पहुंच पाते हैं। एक नजर इस सफर के 10 अहम पड़ावों पर।

फिल्म – देख इंडियन सर्कस (2011)

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साल 1999 में पहली बार परदे पर दिखे नवाजुद्दीन के करियर में जिक्र करने लायक पहला रोल इसी फिल्म में आया। मंगेश हदवाले के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार राजस्थान के एक समुदाय राबड़ी से आता है। उन्हें मिट्टी का बेटा यानी धरतीपुत्र कहा जाता है। यह समुदाय हमेशा एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्राएं करता है। फिल्म में जेठू अपने बीवी बच्चों की देखभाल करने वाला और उन्हें प्यार करने वाला इंसान हैं। वह और उसकी पत्नी एक दूसरे से बचपन से प्यार करते हैं और एक दूसरे पर बहुत भरोसा भी करते हैं। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नवाजुद्दीन को नेशनल फिल्म अवार्ड्स का स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया था।

फिल्म – तलाश (2012)

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इस फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार एक लंगड़े इंसान और भारत के लिए एक विवादित नाम तैमूर का है। इस साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर ड्रामा फिल्म को जानी-मानी निर्देशक रीमा कागती ने फिल्माया है। भारत के लिए तैमूर इसलिए विवादित है क्योंकि तैमूर लंग ने भारत में 14वीं शताब्दी में नरसंहार किया था। तैमूर मुगलों का पूर्वज था जिन्होंने 16वीं शताब्दी से लेकर 18वीं शताब्दी तक भारत पर राज किया है। आजकल सैफ अली खान और करीना कपूर के इकलौते बेटे का नाम भी तैमूर है। एक बच्चे का नाम तैमूर रखने पर भी इन दोनों की खूब आलोचनाएं हुई थीं हालांकि तैमूर का असल मतलब अरबी भाषा में फौलाद से होता है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नवाज को सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के एशियन फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया।

फिल्म – कहानी (2012)

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फिल्म के निर्देशक सुजॉय घोष ने यह किरदार जानबूझकर शारीरिक तौर पर एकदम दुबला पतला लेकिन दिमाग से बहुत होशियार, देशभक्ति से परिपूर्ण और वफादार बनाया। एक आईबी ऑफिसर होने के बावजूद वह एक सस्ती सिगरेट का सेवन करता है। नवाजुद्दीन ने इस फिल्म में जिस सिगरेट का सेवन किया है, वह अपने संघर्ष के दिनों में भी उसी सिगरेट का सेवन करते थे। यह फिल्म नवाजुद्दीन के लिए एक बहुत बड़ा मौका रही। इससे पहले वह 12 साल तक छोटे-मोटे किरदारों के साथ संघर्ष करते रहे। इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त कलाकारों में से एक हो गए।

फिल्म – गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012)

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नवाजुद्दीन के फिल्मी करियर की दो भागों में बनी यह फिल्म सबसे बड़ी हिट फिल्म है। उनके खास सखा और निर्देशक अनुराग कश्यप की इस फिल्म ने नवाजुद्दीन की ऐसी ब्रांडिंग कर दी कि इस छवि से बाहर निकलने की उनकी हर कोशिश कम पड़ जा रही है। नवाजुद्दीन ने इस फिल्म में एक गैंगस्टर का किरदार निभाया है जो अपने परिवार के लोगों की हत्या का बदला उस एरिया के दूसरे गैंगस्टरों से लेता है। इस क्राइम ड्रामा फिल्म मैं एक कमाल की बात यह है नवाजुद्दीन ने इस फिल्म में ऋचा चड्ढा के बेटे का किरदार निभाया है। पूरी फिल्म में नवाज ऋचा को बुढ़िया कह कर बुलाते हैं। लेकिन, हकीकत में जिस समय यह फिल्म आई थी, उस समय ऋचा चड्ढा की उम्र 25 साल थी, जबकि नवाजुद्दीन 38 वर्ष के थे। ऋचा चड्ढा को आज भी ये फिल्म करने का अफसोस होता है।

फिल्म – द लंचबॉक्स (2013)

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रितेश बत्रा के निर्देशन बनी यह फिल्म शानदार फिल्मों में से एक है। इस साधारण सी रोमांटिक कहानी में इरफान खान, निमृत कौर और नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। नवाजुद्दीन इस फिल्म में इरफान खान के दफ्तर में एक जूनियर के तौर पर नजर आए। शुरुआत में नवाज का किरदार शेख इरफान को बहुत तंग करता है। क्योंकि इरफान अपनी पत्नी की मौत के बाद बहुत अकेले-अकेले से रहते हैं। बाद में इन दोनों में अच्छी दोस्ती हो जाती है। इस फिल्म में भी नवाजुद्दीन ने शानदार अभिनय किया है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया।

फिल्म – बजरंगी भाईजान (2015)

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इस फिल्म में नवाजुद्दीन का किरदार पाकिस्तान के असली पत्रकार की जिंदगी पर आधारित है। यह पत्रकार जिस चैनल के लिए काम करता है उसके लिए कभी भी कोई अच्छी खबर बनाने में हमेशा नाकामयाब रहता है। शुरुआत में चांद नवाब बजरंगी को एक भारतीय जासूस समझता है लेकिन जैसे ही उसे सच्चाई का पता चलता है तो फिर वह बजरंगी का सहयोग करने लग जाता है। वह शाहिदा को उसके परिवार से मिलाने मैं बजरंगी की पूरी मदद करता है।

फिल्म – बदलापुर (2015)

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श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और वरुण धवन दोनों ने ही बहुत ही दमदार किरदार निभाए हैं। फिल्म में नवाजुद्दीन को बोलने के लिए संवाद भी नहीं दिए गए थे। फिर भी उन्होंने ऐसे कई दृश्य रहे जिनमें मात्र अपनी अदाकारी से ही उनमें जान डाल दी। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए नवाजुद्दीन को सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

फिल्म – रमन राघव 2.0 (2016)

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इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म का निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी इस फिल्म में एक रियल लाइफ किलर रमन राघव के किरदार में नजर आए जो 60 के दशक में मुंबई में कत्लेआम किया करता था। कहानी चूहा बिल्ली और चोर पुलिस जैसी ही है। फिल्म में विक्की कौशल एक भ्रष्ट पुलिस वाले का किरदार निभाते हैं जो राघव को पकड़ने के लिए दिन रात एक करता है। इस किरदार के लिए भी नवाजुद्दीन की खूब सराहना हुई और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के एशियन पेसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड से स्पेशल जूरी प्राइज मिला।

फिल्म – मॉम (2017)

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इस फिल्म में नवाज का किरदार उनकी बाकी फिल्मों से एकदम अलग ही रहा। वह एक डिटेक्टिव दयाशंकर कपूर यानी डीके के किरदार में नजर आए। इस फिल्म में काम करने का नवाज का मकसद सिर्फ इतना था क्योंकि वह श्रीदेवी के साथ काम करना चाहते थे। फिल्म की कहानी में जब श्रीदेवी की बेटी का रेप हो जाता है, उसके बाद वह डिटेक्टिव डीके को याद करती हैं। डीके भी उनकी परेशानियों को भलीभांति समझता है क्योंकि वह भी एक बेटी का पिता है और उसकी बेटी का भी रेप हुआ था। इस फिल्म में नवाज ने शानदार अभिनय करके दिखाया है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्म फेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया।

फिल्म – मंटो (2018)

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उर्दू के मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की इस बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म का निर्देशन नंदिता दास ने किया है। इस फिल्म के लिए नंदिता की पहली पसंद नवाजुद्दीन सिद्दीकी नहीं थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में भी कहा था कि इस किरदार के लिए उन्हें इरफान खान की दरकार थी क्योंकि यह लेखक उर्दू भाषा में बहुत अच्छे थे। उसका किरदार इरफान भली भांति निभा सकते थे। लेकिन फिर बाद में उन्होंने नवाजुद्दीन के नाम की घोषणा कर दी। नवाजुद्दीन ने भी इस फिल्म में बिना पैसे लिए काम किया है। शानदार अदाकारी दिखाने पर नवाज को इस फिल्म के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के एशिया पेसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड से नवाजा गया।

‘ठाकरे ( 2019 )

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बॉलीवुड अभिनेता नवाजउद्दीन सिद्दीकी ने महाराष्ट्र के किंग मेकर बाला साहब ठाकरे की बायॉपिक ‘ठाकरे’ के सीक्वल ‘ठाकरे’ 2 की स्क्रिप्ट पर काम शुरू हो गया है और वह इस फिल्म में भी काम करेंगे। नवाजुद्दीन ने शिव सेना प्रमुख बाला साहब की बायोपिक ‘ठाकरे’ में उनकी भूमिका निभाई थी। अब फिल्म के पार्ट 2 यानी ‘ठाकरे 2’ पर काम शुरू हो गया है।नवाज ने बताया कि ‘ठाकरे 2’ की स्क्रिप्टिंग का काम शुरू हो गया है, जैसे ही लिखाई का काम पूरा हो जाएगा, वह शूटिंग से पहले की जाने वाली वर्कशॉप शुरू कर देंगे।