परिवार ने कचरे के ढेर के पास बुजुर्ग को छोड़ा लावारिस, अचानक पहुंचा एक फरिश्ता!

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दोस्तों आज इस कोरोना महामारी के बीच लोग अनजान लोगो की मदद कर इंसानियत होने का लोगो को भरोसा दिला रहे है लेकिन इस महामारी के बीच कुछ ऐसी भी घटना सामने आ रही है जिसे सुनने के बाद लोगो को रिश्ते और रिश्तेदारों से भरोसा उठ जायेगा। हाल ही में स्थानीय निवासी भरत सकपाल ने एक बूढ़े व्यक्ति को कूड़े के ढेर के पास पड़ा देखा और सीआईडी ​​द्वारा चलाए गए फ्रेंड्स फॉर वीमेन एंड चिल्ड्रन (एफएफडब्ल्यूसी) को सूचित किया इसके बाद सीआईडी उस व्यक्ति आदमी को पुलिस के पास ले गई।

परिवार ने कचरे के ढेर के पास बुजुर्ग को छोड़ा लावारिस, अचानक पहुंचा एक फरिश्ता! 5 सूरत के एक स्थानीय भरत सकपाल ने रविवार को अपने बच्चों द्वारा घर से निकाल दिए गए एक बुजुर्ग की मदद की, उसकी स्थिति के बारे में पुलिस को सूचित करके उस बुजुर्ग के सिर पर आश्रय का प्रबंध किया। सकपाल ने जब एक कूड़ेदान के पास  सोते हुए बूढ़े से कमजोर आदमी को देखा तो उसके पास जाकर उससे बात की और उससे उसके परिवार के बारे में पूछा। इसके बाद सकपाल ने फ्रेंड्स फॉर वीमेन एंड चिल्ड्रन (एफएफडब्ल्यूसी) समूह के एक स्वयंसेवक पीयूष शाह को सूचित किया।अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंड्स फॉर वीमेन एंड चिल्ड्रन (एफएफडब्ल्यूसी) समूह के पीयूष शाह बुजुर्ग व्यक्ति को अठवालाइन्स पुलिस स्टेशन ले गए और उससे बात करके सारी जानकारी प्राप्त की। जहाँ उस बूढ़े आदमी ने खुलासा किया कि उसके तीन बच्चे हैं जिनमे से एक बेटा और दो बेटियाँ हैं।

परिवार ने कचरे के ढेर के पास बुजुर्ग को छोड़ा लावारिस, अचानक पहुंचा एक फरिश्ता! 6

कोरोना संक्रमण से उसकी बेटी की मौत हो जाने से, जो उसकी देखभाल कर रही थी, वह बेघर हो गया और सड़क पर ही सो गया था। इस उम्र में उनकी देखभाल के लिए बाकि बच्चों में से कोई भी तैयार नहीं थे।अठवालाइन्स पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर धर्मेश गामी ने तब उस आदमी के परिवार की तलाश शुरू की। छानबीन के बाद उन्हें बुजुर्ग आदमी के बच्चों का पता चला। उन्होंने बेटे और बेटी को पिता के बारे में सूचित किया। पुलिस इंस्पेक्टर धर्मेश गामी ने उन्हें ये भी बताया कि उनके पिता को इस तरह लावारिस छोड़ने पर उन पर आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। यह सुनकर बच्चे आए और अपने पिता को घर ले गए।