बाजीराव पेशवा की इस भूल का नतीजा हिंदुस्तान को 200 सालों तक भुगतना पड़ा

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बाजीराव पेशवा को महाराष्ट्र साम्राजय का सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली योद्धा माना जाता है उन्होंने छत्रपति साहू महाराज के साम्राज्य को सुदूर प्रांतो में फहलाने और मराठा गौरव को बढ़ाने का काम किया था बाजीराव पेशवा  अखेले ऐसे योद्धा थे जिन्होंने इकतालीस लड़ाई  लड़ी और एक भी नहीं हारी बाजीराव दिल्ली में मुगलो को हराकर पुरे देश को एक सूत्र में बांधना चाहते थे उन्होंने दिल्ली के मुगलो को अपनी ताकत का एहसास करवाया जरूर पर वो दिल्ली पर कब्ज़ा किये बगैर ही वापस पुणे आ गये उनकी यही भूल अभिशाप बन गई बाजिराव के पेशवा बनने के बाद मुग़ल सम्राट मोहमद शाह ने शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए राज्य को मराठा का अदिकार मानाने से ही इंकार करदिया था

बाजीराव ने मुगलो को सबक सीखने का निश्चय किया उन्होंने १२ नवंबर 1736 को पुणे से दिल्ली मार्ग शुरू किया १० दिन की दूसरी बाजीराव ने 500 घोड़ो के साथ 48 घंटे में पूरी करली उनकी रणनीति के कारन ही मुग़ल की सेना आगरा मथुरा में ही अटक गई और बाजीराव दिल्ली पहुंच गए

मुग़ल बादशाह महल में बंद होकर बाजीराव के हमले का इंतजार करते रहे पुरे मराठा सैनिक दिल्ली में फ़ैल गए मुग़ल बादशाह की लाल किले से बहार निकलने की हिम्मत नहीं हुई बहुत दिनों तक बाजीराव ने दिल्ली को अपने कब्जे में रखा और मुग़ल बादशाह भागने ही वाला होता है की  बाजीराव ने दिल्ली से वापसी का फैसला करलिया बाजीराव के लिए लालकिले में घुसकर कब्ज़ा करलेना सरल था पर बाजीराव की जान तो महाराष्ट्र में बस्ती थी कुछ दिन दिल्ली में डेरा डालने के बाद बाजीराव वापस लोट आये  उनका ये फैसले ने मुग़ल साम्राज्य को नया जीवन दान दे दिया

बाजीराव के इस फैसले के पीछे मराठा दरबार के वो अधिकारी थे जिन्होंने साहूजी महराज को बाजीराव के लिए भड़काया था  जिसके बाद उन्हें वापस आना पड़ा था