खुद की गर्लफ्रेंड छोड़ जीतेन्द्र कर रहे थे हेमा से शादी, फिर चली धर्मेन्द्र ने ये चाल

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बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी आज अपना जन्मदिन मन रही है.  ऋषि कपूर, करण जौहर के बाद अब बायोग्राफी की लिस्ट में हेमा मालिनी का भी नाम जुड़ने जा रहा है। उनकी बायोग्राफी ‘बियोंड द ड्रीम गर्ल (Beyond The Dream Girl)’ सोमवार को हेमा के 69वें बर्थडे के मौके पर लॉन्च हो रही है। उनकी आत्मकथा को फिल्म मैग्जीन ‘स्टारडस्ट’ के एक्स एडिटर और प्रोड्यूसर राम कमल मुखर्जी ने लिखा है। वहीं इस किताब की प्रस्तावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखी है।

आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसा किस्सा जिसने हेमा को धर्मेन्द्र के हाथो से जाने से बचा लिया. दरअसल हेमा मालिनी और जीतेन्द्र ने ‘दुल्हन'(1974) और ‘खुशबू'(1975) में साथ काम किया था। इसी बीच ये दोनों अच्छे दोस्त बन गए।बायोग्राफी की मुताबिक दोनों में काफी अच्छी बॉन्डिंग हो गई थी। हेमा उन चुनिंदा लोगों में थीं जिन्हें जितेन्द्र और मुमताज के अफेयर के बारे में पता था।  जीतेन्द्र और हेमा की फैमिली चाहती थीं कि ये शादी कर लें। फैमिली की बात मानकर दोनों ने हां भी कह दी थी और मद्रास में इसकी तैयारियां भी शुरू हो गईं लेकिन ये शादी हो नहीं सकी।

दरअसल धर्मेंद्र को इस शादी के बारे में पता चल गया था। ऐसे में वे नशे में जीतेन्द्र की एयरहोस्टेस गर्लफ्रेंड शोभा को लेकर मद्रास हेमा के घर पहुंच गए। जीतेन्द्र ने शोभा जो की अब उनकी पत्नी है से साफ मना कर दिया था लेकिन धर्मेंद्र ने हार नहीं मानी।  धर्मेंद्र के इस रवैइए से हेमा के पेरेंट्स काफी गुस्से में थे लेकिन बाद में हेमा और धर्मेंद्र काफी टाइम तक अंदर कमरे में अकेले बात की और आखिरकार ये शादी टूट गई थी।


बायोग्राफी में धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर और बेटे सनी-बॉबी देओल से हेमा के रिश्तों पर आत्मकथा में कुछ नहीं लिखा गया है। दरअसल किताब हेमा की जिंदगी पर है इसलिए इसमें तमाम दूसरी चीजें शामिल नहीं की गई हैं।  धर्मेंद्र ने पहली शादी प्रकाश कौर और दूसरी हेमा मालिनी से की थी। उनके दोनों परिवारों से बीच का रिश्ता काफी नाजुक है।  प्रकाश कौर ने एक इंटरव्यू में हेमा को लेकर सवाल भी खड़े किए थे। उन्होंने कहा था, “अगर मैं उनकी हेमा की जगह होती तो कभी ऐसा नहीं करती। धर्मेंद्र भले ही अच्छे पति न हों, लेकिन वो एक अच्छे पिता जरूर हैं।”

दोनों परिवारों में कितनी दूरियां हैं ये बात तब साबित हो गई जब हेमा की बेटियों ईशा और अहाना की शादी में सनी और बॉबी देओल दूर-दूर तक दिखाई नहीं दिए। सिर्फ धर्मेंद्र ही यहां पहुंचे थे। बायोग्राफी के जरिए हेमा मालिनी के आध्यात्मिक जीवन का भी खुलासा होगा। किताब में इस बात का जिक्र भी है कि हेमा मालिनी और जयललिता एक साथ तमिल फिल्म से डेब्यू करना चाहती थीं, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। दरअसल दोनों के एक फिल्म साइन करने के बावजूद भी वो प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। बाद में 16 साल की उम्र में राजकपूर के ऑपोजिट ‘सपनों का सौदागर’ के जरिए वो हिंदी फिल्मों में हीरोइन के तौर पर नजर आईं।

हेमा मालिनी की बायोग्राफी में दोनों बेटियों ईशा देओल और आहना देओल का भी जिक्र है। दोनों बेटियों के बचपन, करियर, शादी से जुड़े तमाम पहलू पर बात की गई है। आत्मकथा में बताया गया है कि उन्होंने कैसे राजनीति में एंट्री की। इसके लेखक रामकमल ने इसमें लिखा है कैसे 1999 में गुरदासपुर लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार विनोद खन्ना के प्रचार के बाद हेमा राजनीति में आई। हेमा के पार्टी जॉइन करने और राज्यसभा-लोकसभा सांसद बनने तक की कहानी है। साथ ही इसमें 2015 में हुए हेमा मालिनी के कार एक्सीडेंट का भी जिक्र किया गया है।

बायोग्राफी में इस बात की भी जिक्र है कि फिल्मों के लिए प्रोड्यूसर्स, डायरेक्टर्स हेमा से नहीं बल्कि उनकी मां जया लक्ष्मी चक्रवर्ती से बात करते थे। हेमा की मां को यदि फिल्म में कोई सीन आपत्तिजनक लगता था, तो वे साफ तौर पर उसे हटाने को कह देती थीं। हेमा एक स्टाइलिश हीरोइन के तौर पर जानी जाती हैं। पोल्का डॉट्स, ओवरसाइज्ड सलग्लासेज, प्लेटफॉर्म हील्स का ट्रेंड उन्होंने ही शुरू किया था फ़िलहाल हेमा बीजेपी की तरफ से सांसद है और वे राजनीती में सक्रिय है.