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शाहरुख़ को पापा कह के नहीं बुलाती सुहाना, जानिए इन सितारों के पिता से कैसे है सम्बन्ध

एक बच्चे के लिए दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह अपने पिता की बाहों से बढ़कर कुछ नहीं हो सकती. एक पिता जो डांटता भी है और प्यार भी करता है. उसकी आंखों में नजर आने वाला गुस्सा महज इस बात की गवाही और संतोष है कि बच्चे सही राह पर चलते रहें। यूं, कुछ फादर दोस्तों जैसे भी होते हैं, वे खूब खुलकर बच्चों से बात करते हैं। सवाल ये कि जब ये बच्चे खुद पिता बन जाते हैं तो किस तरह पिता के संग अपने रिश्ते को याद करते हैं और क्या बताते हैं – खुद के बच्चों के साथ उनका रिश्ता कैसा है. देखते है बड़े सितारों के अपने पिता से कैसे है सम्बन्ध.

शाहरुख खान 3 बच्चो के पिता है. जिनमे से दो अब काफी बड़े हो चुके है. शाहरुख खान ने बताया पिता और बच्चे, दोनों से मेरा रिश्ता बिल्कुल अलग नहीं है। दुर्भाग्यवश मेरे बच्चे, मेरे पेरेंट्स को नहीं देख सके हैं। मैं दोनों से अपने रिश्ते को एक जैसा ही पाता हूं। बहुत कम उम्र में मेरे पिता की मृत्यु हो गई थी, लेकिन हमारा रिश्ता बेहद दोस्ताना था। हम एक-दूसरे से कुछ भी कह सकते थे, जिस तरह से चाहें – बात कर सकते थे। मैं अपनी बेटी से भी ‘कूल’ लहजे में बातें करता हूं। ऑफकोर्स, बेटे से भी, क्योंकि ये तो ब्वॉय टू ब्वॉय वाली चीज हो जाती है। जिस तरह से मैं अपने बच्चों के साथ होता हूं, वो बहुत सामान्य और वयस्कों की तरह होने वाली बात है। सुहाना हमेशा चाहती है कि सेट पर आए और मेरे साथ थोड़ा वक्त बिताए। सेट पर मौजूद लोग ये देखकर अक्सर हैरत में पड़ जाते हैं कि बच्चे मेरे साथ दोस्ताना लहजे में बात करते हैं। सुहाना मुझे ‘ब्रो’ कहती है और आर्यन पापा बुलाते हैं।

सैफ अली खान ने बताया, बेहद व्यक्तिगत सवाल है। इसके जवाब में मैं बहुत थोड़ा ही कहना चाहूंगा। एक अभिभावक के रूप में बच्चों के लिए जो कुछ आप करते हैं, वो उनके लिए प्रासंगिक होता है। इससे वे प्रभावित होंगे कि उन्हें कैसा बनना चाहिए, या फिर नहीं होना चाहिए। बहुत सी चीजें हैं, जो मैं अपने पिता की तुलना में एकदम अलग तरीके से करता हूं। मैं ये कहते हुए थोड़ा झिझकता हूं कि एक पुरुष, पति और बतौर पिता मेरे वालिद मुझसे ऊंचे दर्जे के इंसान थे। शायद, ऐसा होना भी चाहिए। उम्मीद करता हूं कि मेरा बेटा भी ऐसी ही बात कहेगा।

फरहान अख्तर का कहना है, मैं जब छोटा था, तब मेरे पिता घर पर कम ही रह पाते थे, लेकिन मेरे बच्चे मुझे ज्यादा वक्त के लिए अपने पास मौजूद पाते हैं। (मुस्कुराते हैं) मुझे नहीं पता कि मेरी बेटियां “लकी’ हैं या नहीं! हो सकता है कि वे अपना व्यक्तिगत स्पेस चाहती हों और मैं ज्यादा दखल दे रहा हूं। सच तो ये है कि जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो पिता के साथ और वक्त बिताने लगा था। मुझे नहीं लगता कि जितना वक्त अकीरा मेरे साथ रहती है, मैं उतना समय डैड के संग रह पाया। शायद यही सबसे बड़ा अंतर है।