केदारनाथ’ का जबर्दस्त विरोध शुरू, उत्तराखंड के 7 जिलों में केदारनाथ मूवी पर लगा बैन!

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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की जोड़ी वाली इस फिल्म की कहानी 2013 में आयी केदारनाथ त्रासदी की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह फिल्म आज देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी। निर्माता एवं निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म ‘केदारनाथ’ को लेकर उत्तराखंड में जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया है। फिल्म को लेकर जहां जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं साधु संत इसे हिन्दू आस्था के खिलाफ बता रहे हैं।

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सरकार ने इस मामले को लेकर एक समिति का गठन किया है। सरकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी।साधु संत फिल्म की कहानी को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि मोक्ष के धाम केदारनाथ को जिस तरह प्यार के धाम के रूप में दर्शाया गया है, साधु संत उससे उद्वेलित हैं। स्वामी दर्शन भारती उर्फ देवेन्द्र सिंह पंवार व अन्य की ओर से इस मामले को आज उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया है कि फिल्म देश ही नहीं दुनिया में केदारनाथ को लेकर गलत संदेश प्रस्तुत कर रही है।  यह केदारनाथ जैसे पवित्र धाम के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के प्रदर्शन से देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे भड़क सकते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इसे संविधान की धारा 21 व 25 के विरूद्ध बताया गया है।

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प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अशोक कुमार ने यहां मीडिया को बताया कि इस फिल्म को उत्तराखंड के उन सात जिलों में प्रतिबंधित कर दिया गया है जहां हिंदू संगठन इस फिल्म के पोस्टर फाड़कर और फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के पुतले जला कर अपना विरोध जता रहे हैं. कुमार ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधमसिंह नगर, पौडी,टिहरी और अल्मोडा जिलों में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

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केदारनाथ हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है और भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से वह प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। केदारनाथ को मोझ का धाम माना जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि फिल्म में केदारनाथ के इतिहास को गलत ढंग से पेश किया गया है और इससे सीधे-सीधे उत्तराखंड ही नहीं देश व दुनिया के लोगों की आस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म में दिखाए गए इन तथ्यों की अनदेखी की है। फिल्म में केदारनाथ को प्यार का धाम बताया गया है।

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इसके साथ ही फिल्म में वर्ष 2013 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा को लेकर भी गलत तथ्य पेश किए गए हैं।याचिकाकर्ता की ओर से सात दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म केदारनाथ को वर्तमान स्वरूप में प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है। दूसरी ओर फिल्म के प्रदर्शन को लेकर हिन्दू संगठनों में विरोध है। हिन्दू जागरण मंच ने आज जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सरकार से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। प्रदेश में अन्य जगहों से भी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है।



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