सचिन तेंडुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर का 86 साल की उम्र में निधन!

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दुनिया को सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे दो महान खिलाड़ी देने वाले कोच रमाकांत आचरेकर इस दुनिया में अब नहीं हैं। 87 साल की उम्र में उनका निधन हो गया है, कोच या गुरू कहीं न कहीं शिष्य के जीवन में मां-बाप से भी बड़ी भूमिका निभाते हैं और अगर चर्चा सचिन तेंदुलकर के कोच की हो तो यह और भी अहम हो जाती है। सचिन जैसी शख्सियत के लिए यह एक निजी क्षति है। पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच रमाकांत आचरेकर का बुधवार को मुंबई में निधन हो गया।


आचरेकर का पूरा नाम रमाकांत विठ्ठल आचरेकर था। उनका जन्म 1932 को मुंबई में हुआ था। वह दादर के शिवाजी पार्क में युवा खिलाड़ियों को कोचिंग देते थे। उनकी प्रसिद्धि सचिन तेंडुलकर के गुरु के तौर पर है। आचेरकर मुंबई क्रिकेट टीम के चयनकर्ता भी रहे। उन्होंने सचिन के अलावा विनोद कांबली, अजित अगरकर, चंद्रकांत पंडित और प्रवीण आमरे समेत कई दिग्गज क्रिकेटरों को भी कोचिंग दी थी।

आचरेकर के निधन पर सचिन ने कहा, ”स्वर्ग में भी अगर क्रिकेट होगा तो आचरेकर सर उसे समृद्ध कर देंगे। उनके अन्य छात्रों की तरह मैंने भी क्रिकेट की एबीसीडी उनसे ही सीखी। मेरे जीवन में उनका योगदान शब्दों से नहीं बताया जा सकता। आज मैं जहां खड़ा हूं, उसका आधार उन्हीं ने बनाया था।’ 86 साल के आचरेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर के बचपन के कोच थे।

एक मैच में जैसे ही सचिन आउट होते, आचरेकर उन्हें लेकर शहर के जिस भी मैदान में मैच चल रहा हो, वहां पहुंचते और सचिन से बैटिंग कराते। दूसरे बच्चों का नुकसान ना हो, इसीलिए सचिन को 50 रन से ज्यादा बैटिंग की इजाजत नहीं थी। जब सचिन नेट्स पर बैटिंग करते, तो अाचरेकर स्टम्प पर सिक्का रख देते थे। नेट्स के अंत तक अगर सचिन नॉटआउट रहते तो ये सिक्का सचिन का, वरना आउट करने वाले बॉलर का होता। सचिन के पास ऐसे 13 सिक्के आज भी हैं।

उन्होंने अपने साक्षात्कार में यह भी बताया कि ‘सर कभी-कभी बहुत स्ट्रिक्ट भी थे, काफी अनुशासित थे लेकिन उतना ही प्यार और दुलार भी करत थे। मैं ने भले ही कितना बेहतर खेला हो लेकिन उन्होंने कभी मुझे वेल प्लेड नहीं कहा, हां एक बात थी सर मुझे भेल-पुरी या फिर पानी-पुरी खिलाने के लिए ले जाते तो मुझे लग जाता था कि मैं ने आज मैदान में कुछ अच्छा किया, सर आज खुश हैं। 14 साल के सचिन से अाचरेकर ने जूनियर मैच खेलने के लिए कहा, पर सचिन एक सीनियर मैच देखने पहुंच गए। आचरेकर आए, सचिन को थप्पड़ लगाते हुए कहा- तुम्हें दूसरों के खेल पर ताली नहीं बजानी है, तालियां हासिल करनी हैं। रमाकांत आचरेकर युवा क्रिकेटरों के लिए एक प्रेरणास्रोत रहे हैं। 1988 में सचिन तेंदुलकर और विनोद काबंली ने स्कूल क्रिकेट में 664 रनों की पारी खेलकर नया रिकॉर्ड बनाया खा। सचिन की उम्र उस समय 15 साल से भी कम थी। वहीं, कांबली 16 साल के थे। उन्होंने शारदाश्रम विद्यामंदिर की ओर से खेलते हुए सेंट जेवियर्स के खिलाफ हैरिस शील्ड सेमीफाइनल में क्रमश: 326 और 349 रनों की पारी खेली थी। इस समय उनके कोच रमाकांच आचरेकर ही थे।